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ADAMA Mainsul Sulphur (सल्फर) का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है।

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ADAMA Mainsul Sulphur (सल्फर) का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है। कृषि संबंधी जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े। नीचे दी लिंक पर क्लिक करे । कृषि सेवा फेसबुक पेज से जुड़ने यहा क्लिक करे । Mainsul Sulphur क्या है..?? यह एक सल्फर टेक्निकल से बनाया गया कणक हैं जिसमे भार के हिसाब से 80% सक्रिय तत्व है।  Mainsul Sulphur का उपयोग क्यों किया जाता है..?? इसका उपयोग फसलो पर फफूंदी की रोकथम के लिए किया जाता है । सल्फर के उपयोग से पौधे में सल्फर की कमी पूरी होती है साथ ही Mainsul Sulphur के पाउडर फॉर्म में होने के कारण तुरन्त ही फसलो को सल्फर प्राप्त करवाता है। सल्फर के इस्तेमाल से पौधे में हरापन आजाता है और दाने का आकार बढ़ाने के साथ साथ दाने का बजन भी बढ़ाता है जिससे हमारा एवरेज बढ़ता है। Mainsul Sulphur को उपयोग करने की विधि- Mainsul Sulphur  (सल्फर) का उपयोग सिचाई से पहले 3 किलो / एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे।   खेती की अधिक जानकारी के लिए आप हमारे व्हाट्सएप् ग्रुप से जुड़ सकते हैं। व्हाट्सएप्प ग्रुप में जु...

ARYSTA Devitara (देवीतारा) का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है।

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ARYSTA Devitara (देवीतारा)  का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है। ARYSTA Devitara (देवीतारा) क्या है...?? ARYSTA Devitara (देवीतारा) (थायामेथोक्साम 25% डब्ल्यू जी) एक बहुउपयोगी अंतप्रवाही कीटनाशक है जो तीव्र उदरीय तथा संस्पर्शी क्रियाशीलता रखता है। ARYSTA Devitara (देवीतारा) किन किन रोगों पर काम करता है..?? देवीतारा का उपयोग धान की फसल में लगने वाले तना छेदक, माजू मक्खी, पत्ति मोडक, भूरा पत्ति टिड्डा, सफेद पौधा टिड्डा, हरा पत्ती टिड्डा, चुरदा। कपास में माहो, तेला, सफेद मक्खी। आम में टीड्डो। गेहूं में माहो। बैगन में माहो व तेला। सरसो में माहो। टमाटर में सफेद मक्खी। चाय में मच्छर किट तथा आलू में माहो के रोकथाम के लिए किया जाता है। ARYSTA Devitara (देवीतारा) को उपयोग करने की विधि- देवीतारा का उपयोग करने के लिए 100 ग्राम/एकड़ की दर से इस्तेमाल करे और एक एकड़ में कमसे कम 100 लीटर पानी का उपयोग करे । साफ पानी के इस्तेमाल करे और साथ मे सर्फेक्टेंट (चिपको) मिलाये ।

UPL Saafilizer का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है।

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UPL Saafilizer ( साफ़िलाय जर)  का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । कृषि संबंधी जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े।  नीचे दी लिंक पर क्लिक करे । कृषि सेवा फेसबुक पेज को जॉइन करने के लिए यहा क्लिक करे। साफ़िलाय जर क्या है..?? UPL Saaf को यूरिया मैं मिलाके छिटका लगाने की प्रक्रिया को साफ़िलायजर कहते है। साफ़िलाय जर का उपयोग हमे क्यों करना चाहिए..? मिट्टी में जब हम खाद देते है तो आधे से ज्यादा खाद मिट्टी सोक नही पाती है जिसका का कारण है सेप्रोफायट्स. सेप्रोफायट्स एक तरीके की फफूंद यानी फंगस है जो ऊतक यानी टिश्यू को खाती है आम तौर पर सेप्रोफायट्स फसल को नुकसान नही पहुचाते लेकिन ये अप्रत्यक्ष रूप से जड़ो पर परत बना लेते है।  परत बनने के कारण जड़ो के छोटे छोटे छिद्र बन्द हो जाते है और जमीन के पौषक तत्वों को नही सोक पाते है। जिससे पौधे आस्वस्थ ओर कमजोर पड़ जाते है जिस्से फसल की उत्पादन छमता से फसल कम निकलती है । इस रोग से मुक्त होने के लिए हमे  साफ़िलाय जर का उपयोग करना चाहिए। साफ़िलाय जर के फायदे- ये जड़ो को साफ और स्वस्थ रख...

UPL Startup Mitra का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है।

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 UPL Startup Mitra का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । कृषि संबंधी जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े।  नीचे दी लिंक पर क्लिक करे । कृषि सेवा फेसबुक पेज को जॉइन करने के लिए यहा क्लिक करे। UPL Startup Mitra ( टेबुुुकोनाजोल 2% डी.एस.) एक अंतप्रवाही फफूंदनाशक हैं। जीसमें टेबुकोनाजोल सक्रिय तत्व है। बाकी निष्क्रिय ओर सहयोगी पदार्थ है।  अंतप्रवाही फफूंदनाशक होने के कारण यह बीज उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। जो बीज के बाहरी भाग ओर अंदर छुपे हुए रोगजनक को प्रभावी ढंग से नियंत्रण करता है यह गेहूं में होने वाली कंडवा व झण्डा कंडवा तथा मूंगफली में लगने वाले कॉलर राट, जड़ गलन व तना गलन की भी कारगर ढंग से रोक थाम करता है।                                     उपयोग                               फसल - गेंहू                         ...

UPL Startup Reno का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । और किन किन फसलो में इसका उपयोग कर सकते है।

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UPL Startup Reno  का कैसे इस्तेमाल करे और क्या है इसके फायदे । UPL Startup Reno का इस्तेमाल हम बीज उपचार में करते है।  रेनो एक कीटनाशक है। रेनो हमारी फसल को कीटो से बचाती है। रेनो किन किन कीटो से बचाता  है    01. तेला।  02. माहू।             03. सफेद मच्छर।    04. दीमक।            05. सफेद कीड़े।           06. शूट  फ्लाई। रेनो से बीज उपचार करने से हमे क्या फायदे होते है फसल को शुरुआती अवस्था में रोग,चूसक किट , दीमक एवं सफेद कीड़ो से बचाता  है । उपयोग की विधि :- प्रति एकड़ बीज दर  अनुसार बीज की मात्रा एक प्लास्टिक शीट पर फैलाऐ। एक खाली साफ बर्तन ले उसमे 250 मिली रेनो को खाली करदे। अब उसमें 500 मिली पानी मिलाये । घोल बनाकर 1 क्विंटल बीज को प्लास्टिक शीट पर फैला दें और घोल का छिड़काव करके अच्छे से मिला ले ताकि सारे बीज में रेनो मिल जाये । अब उसको 30 मिनट  छाँव  में सुखाएे।  अब आपका बीज बोबनी के लिए तैयार है।  ...

आलू के झुलसा रोग से कैसे । क्यों लगता है झुलसा रोग । कैसे करे झुलसा रोग का प्रबंध।

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आलू के झुलसा रोग से कैसे । क्यों लगता है झुलसा रोग । कैसे करे झुलसा रोग का प्रबंध। तापमान गिरने और लगातार मौसम में बदलाव से इस समय आलू की फसल में कई तरह के लोग लग जाते हैं, अगर समय रहते इनका प्रबंधन न किया गया तो आलू किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस बारे में केंद्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र, मोदी पुरम के प्रमुख वैज्ञानिक बताते हैं, "अभी तो आलू की फसल में कोई रोग लगने की जानकारी नहीं आयी है, लेकिन आने वाले समय में रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन बादल होने पर आलू की फसल में फंगस का इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है, जो झुलसा रोग का प्रमुख कारण होता है। जैसे ही बादल आए तुरंत दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।" कृषि संबंधी जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े। नीचे दी लिंक पर क्लिक करे । कृषि सेवा फेसबुक पेज से जुड़ने यहा क्लिक करे । वो आगे बताते हैं, "इस समय किसानों को चाहिए कि खेत में नमी बनाए रखें और शाम के समय अगर कहीं पर कोहरा दिखायी दे तो शाम के समय घास-फूस इकट्ठा करके आग चलाकर धुआ करना चाहिए।" इस समय भारत दुनिया में आलू के र...

मसूर में ज्यादा उत्पादन कैसे पाएं । मसूर की फसल में ज्यादा उत्पादन पाने के लिए ये पोस्ट पड़े । मसूर की खेती की संपुर्ण जानकारी ।

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 मसूर में ज्यादा उत्पादन कैसे पाएं । मसूर की फसल में ज्यादा उत्पादन पाने के लिए ये पोस्ट पड़े । मसूर की खेती की संपुर्ण जानकारी । कृषि संबंधी जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े। नीचे दी लिंक पर क्लिक करे । कृषि सेवा फेसबुक पेज जुड़ने के लिए यहा क्लिक करे भूमि: दोमट से भारी भूमि इसकी खेती के लिए अधिक उपयुक्त है। धान के बाद खाली खेती में मसूर विशेषकर बोयी जाती है। भूमि की तैयारी : पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल से करके पाटा लगाना चाहिये। संस्तुत प्रजातियॉ : बुवाई का समय समय से बुवाई अक्टूबर के मध्य से नवम्बर के मध्य तक तथा विलम्ब की दशा में दिसम्बर से प्रथम सप्ताह तक इसकी बुवाई करना उपयुक्त है। पन्तनगर जीरो टिल सीड ड्रिल द्वारा मसूर की बुवाई अधिक लाभप्रद है। बीज दर समय से बुवाई हेतु 30-40 किलोग्राम तथा पिछेती एवं उत्तेरा बुवाई के लिए 40-50 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त हैं। बीजोपचार 10 किग्रा० बीज को मसूर के एक पैकेट 200 ग्राम राइजोबियम लेग्यूमिनोसेरम कल्चर से उपचारित करके बोना चाहिए। विशेषकर उन खेतों में जिनमें पहले मसूर न बोई गयी हो। बीज...